यूपी सहित सात राज्यों के बाद अब उत्तराखंड में भी ब्लैक फंगस महामारी घोषित, जानिए कैसे होगा बदलाव

Uttarakhand Government ने लगातार बढ़ रहे मामलों के मद्देनजर लिया अहम फैसला

यूपी, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु, चंडीगढ़ के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने भी ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है। इससे पहले सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित किया था।

देश में जितनी तेजी से कोरोना के बाद ब्लैक फंगस(black fungus) फैल रहा है, वह चिंताजनक माना जा रहा है। तमाम राज्य इसे कोरोना की तरह ही महामारी घोषित कर चुके हैं। इस कड़ी में अब उत्तराखंड सरकार ने भी ब्लैक फंगस को भी महामारी घोषित कर दिया है।

महामारी का अर्थ
जब कोई बीमारी लोगों के बीच एक-दूसरे को संक्रमित करती है, साथ ही उस बीमारी से होने वाली मौत, इंफेक्शन या उससे प्रभावित देशों की संख्या के आधार पर उसे महामारी घोषित कर दिया जाता है। महामारी घोषित करने का फैसला विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को लेना होता है। महामारी पर नियंत्रण करना बहुत मुश्किल होता है। यह धीरे धीरे पूरे विश्व में अपना पैर पसारती है। कोरोना संक्रमण से पहले भी चेचक, हैजा, प्लैग जैसी बीमारियां महामारी के रूप में घोषित की जा चुकी हैं।

Uttarakhand black fungus epidemic

क्या होंगे बदलाव
जब किसी बीमारी को महामारी घोषित किया जाता है तो इसका मतलब होता है कि यह बीमारी पूरे विश्व के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। स्वास्थ्य महकमे को इससे सम्बन्धित पूरी तैयारियां करनी पड़ती हैं और इसके प्रति सचेत होना पड़ता है। महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत ब्लैक फंगस को भी महामारी घोषित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को कहा था।

1897 में जब देश में अंग्रेजी हुकुमत थी तब महामारी ऐक्ट बनाया गया था। खतरनाक बीमारियों के फैलने पर अंकुश लगाना एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाना इस कानून के तहत अनिवार्य है। महामारी घोषित होने के बाद महामारी ऐक्ट के नियमों का सभी राज्यों को पालन करना होता है। राज्यों द्वारा निर्धारित नियमों को न मानने पर इस एक्ट के तहत दण्डित किए जाने का भी प्रावधान है।

इस महामारी एक्ट के तहत ट्रेन, बस या अन्य यात्रा संसाधनों से यात्रा करने वाले लोगों की निगरानी करना एवं संक्रमित व्यक्ति को अस्पताल या अस्थाई आवास में रखवाने का प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। महामारी ऐक्ट अधिनियम के निर्देश की अवहेलना करने की दशा में इसे अपराध की श्रेणी में माना जाएगा और भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत व्यक्ति पर कार्रवाई की जाएगी।

इस ऐक्ट के तहत सरकार द्वारा टीके और दवाओं के वितरण के साथ सम्पूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है। संबधित महामारी के दौरान जिले के समस्त प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों को पूरी जानकारी जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को देनी होगी। महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना अनिवार्य होता है।

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