उत्तराखंड में सस्ती MBBS पढ़ाई को झटका, जानिए क्यों

Uttarakhand NEET UG Counselling 2019 से पहले सरकार ने लिया अहम फैसला

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प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रियायती दर पर पढ़ाई करने की सोच रहे छात्रों को झटका। राज्य सरकार ने बांड की सुविधा की सीमा तय कर दी है। अब केवल श्रीनगर व अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में अनुमन्य होगी बांड की सुविधा। दून व हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में नहीं मिलेगी छात्रों को यह सुविधा। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को अभी नहीं मिली है मान्यता। ऐसे में इस सत्र केवल एक ही कॉलेज में मिलेगी सुविधा।

जो छात्र बांड भरकर अपनी पढ़ाई करता है, उसे एमबीबीएस में 50 हजार रुपए सालाना फीस चुकानी पड़ती है। बांड के तहत ऐसे डॉक्टरों को अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद कुछ समय के लिए उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देनी होती हैं। देहरादून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को 4 लाख रुपए सालाना फीस देनी होगी।

स्वास्थ्य सचिव नितेश कुमार झा के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सकों के 2735 पद हैं सृजित। इसके सापेक्ष 2056 पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं। इस प्रकार राजकीय मेडिकल कॉलेजों से निकट भविष्य में पास आउट होने वाले चिकित्सकों से उक्त सभी पद भर जाएंगे।

बांड की सीमा तय करने के उन्होंने अन्य कारण भी गिनवाए। कहा कि बांड के तहत एमबीबीएस पास करने वाले चिकित्सकों को राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीनियर व जूनियर रेजिडेंट पर तब तक नहीं रखा जा सकता जब तक उनके द्वारा अनुबंध पत्र के तहत दुर्गम में सेवा पूर्ण न कर ली जाए। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों में जेआर एसआर की भारी कमी बनी हुई है। साथ ही बांड पर नॉन क्लीनिकल विषयों में पीजी करने वाले चिकित्सकों के लिए प्रांतीय चिकित्सा सेवा में उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप पद उपलब्ध नहीं हैं।

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