देहरादून के ग्राफिक एरा अस्पताल के विशेषज्ञों ने 71 वर्षीय बुजुर्ग के ब्रेन में ‘डीप ब्रेन स्टिमुलेशन’ (पेसमेकर) लगाकर पार्किंसंस का सफल उपचार किया। जानिए इस आधुनिक तकनीक के बारे में।

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उत्तराखंड ने आज एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देहरादून स्थित ग्राफिक एरा अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक 71 वर्षीय बुजुर्ग के मस्तिष्क में पेसमेकर (DBS) लगाकर पार्किंसंस रोग का सफल उपचार करने में कामयाबी पाई है।
मरीज पिछले 10 वर्षों से पार्किंसंस की गंभीर स्थिति से जूझ रहे थे। उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसमें
हाथों में लगातार तेज कंपकंपी, शरीर में अत्यधिक जकड़न,
चलने-फिरने में भारी धीमापन, रोजमर्रा के सामान्य कार्यों को करने में असमर्थता शमिलनह।
क्या है डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) तकनीक?
विशेषज्ञों ने मरीज के मस्तिष्क में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) यंत्र स्थापित किया, जिसे सामान्य भाषा में ‘ब्रेन का पेसमेकर’ कहा जाता है। यह डिवाइस मस्तिष्क के विशिष्ट हिस्सों में सूक्ष्म विद्युत संकेत (Electrical Signals) भेजती है, जो पार्किंसंस के लक्षणों को पैदा करने वाली असामान्य तरंगों को नियंत्रित करते हैं।
इस जटिल सर्जरी को ग्राफिक एरा अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने अंजाम दिया, जिसमें डॉ. पार्था पी. बिष्णु, डॉ. अंकुर कपूर, डॉ. पयोज पांडेय, डॉ. नेहा अग्रवाल
न्यूरोएनेस्थीसिया और न्यूरोक्रिटिकल केयर टीम के बेहतर तालमेल के कारण सर्जरी पूरी तरह सफल रही।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, यह सर्जरी आमतौर पर देश के बड़े महानगरों तक ही सीमित थी, लेकिन अब उत्तराखंड के मरीजों को इस उन्नत उपचार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है। डॉक्टरों के अनुसार, उनके हाथों की कंपकंपी और शरीर की जकड़न में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। अब वे पहले की तुलना में अधिक सहजता से चलने-फिरने में सक्षम हैं।
