देहरादून के ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में जीएसटी (GST) सुधारों के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन। जानें विशेषज्ञों ने इसे देश के विकास के लिए क्यों बताया गेम चेंजर।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज से जीएसटी (GST) सुधारों और उनके दूरगामी प्रभावों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। इस सम्मेलन में देश और दुनिया भर के विशेषज्ञ एकत्रित होकर जीएसटी से होने वाले आर्थिक विकास और सामाजिक बदलावों पर मंथन कर रहे हैं।
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि जीएसटी भारत की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और एकीकृत बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी ने किसानों, स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों को बिचौलियों के बिना सीधे थोक व्यापारियों और खरीदारों से जुड़ने का एक सशक्त मंच दिया है।
उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि वे आर्थिक नीतियों की गहराई को समझें और नवाचार (Innovation) के माध्यम से देश के विकास में भागीदार बनें।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के प्रतिनिधियों के अनुसार, जीएसटी के लागू होने से ‘टैक्स पर टैक्स’ (करों के दोहराव) की समस्या खत्म हुई है, जिससे व्यापार करना आसान हुआ है। यह देश को एक मजबूत राष्ट्रीय बाजार बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुआ है।
12 तकनीकी सत्रों में होगा गहन मंथन
दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में कुल 12 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें ग्रीन टैक्सेशन और पर्यावरण संरक्षण, छोटे व्यवसायों (MSMEs) पर जीएसटी का प्रभाव, डिजिटलाइजेशन और बदलता उपभोक्ता व्यवहार, अप्रत्यक्ष कर सुधार और नए राजस्व मॉडल प्रमुख हैं।
इस सम्मेलन में 4 देशों और 10 राज्यों के शोधकर्ता और वैज्ञानिक अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत कर रहे हैं। यह कार्यक्रम ग्राफिक एरा के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के हेड डॉ. अजय कुमार पांडे, इन्फिनिट के संस्थापक डॉ. रितेश जैन, केरला यूनिवर्सिटी के डॉ. राजेंद्र बैकाडी, डॉ. विनय कांडपाल और डॉ. एम पी सिंह सहित कई शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रभु माथुर और कीर्ति उदय ने किया।
