देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी और फ्रीस्ट्रीम के बीच हुआ एमओयू। अब बिना सिम कार्ड और इंटरनेट डाटा के सीधे मोबाइल (D2M) पर मिलेगी हाई-क्वालिटी शिक्षा और मनोरंजन। जानें कैसे काम करेगी यह नई तकनीक।

डिजिटल इंडिया की दिशा में उत्तराखंड ने आज एक बड़ी छलांग लगाई है। अब राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों और आम लोगों को मोबाइल पर फिल्में देखने या पढ़ाई करने के लिए न तो सिम कार्ड की जरूरत होगी और न ही महंगे इंटरनेट डाटा पैक की।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और फ्रीस्ट्रीम (FreeStream) के बीच आज एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) साइन किया गया है। आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप द्वारा विकसित इस ‘डायरेक्ट टू मोबाइल’ (D2M) तकनीक की मदद से मनोरंजन और शिक्षा अब सीधे आपकी स्क्रीन पर होगी।
शिक्षा मंत्री ने बताया ‘ऐतिहासिक कदम’
इस एमओयू के दौरान मौजूद उत्तराखंड के शिक्षा एवं चिकित्सा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि यह तकनीक पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा, “यह मेक इन इंडिया की ताकत है। अब उन क्षेत्रों के छात्र भी उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पा सकेंगे जहाँ इंटरनेट की पहुंच नहीं है।”
क्या है यह तकनीक?
फ्रीस्ट्रीम द्वारा विकसित यह तकनीक रेडियो फ्रीक्वेंसी की तरह काम करती है, जो बिना किसी टेलीकॉम नेटवर्क के कंटेंट को सीधे डिवाइस तक पहुंचाती है।
शिक्षा: छात्र बिना डाटा खर्च किए स्किल मॉड्यूल और पाठ्यक्रम देख सकेंगे।
मनोरंजन: फिल्में और टीवी शो सीधे मोबाइल पर उपलब्ध होंगे।
AI जागरूकता: छात्रों को उभरती हुई तकनीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष प्रो. डॉ. कमल घनशाला ने शोध (Research) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल शोध करना ही काफी नहीं, उसे व्यावसायिक स्तर पर लाकर जनता की सुविधा के लिए इस्तेमाल करना जरूरी है।
वहीं, 5G वैज्ञानिक पराग नायक और ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी के चेयरमैन सुनील ने स्पष्ट किया कि यह तकनीक मोबाइल सिग्नल से कहीं बेहतर साबित होगी और डिजिटल डिवाइड (डिजिटल अंतर) को खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगी।
